सर्वहित की भावना -
मनुष्य जो भी काम करें यदि वो सर्वहित की भावना वा सहर्ष परिश्रम के साथ किया जाए तो ईश्वर उसका सुफल देता है।
शास्त्र चर्चा - किसी के प्रति भी कठोर वचन न बोलना और दुष्टों का आदर सम्मान न करना इन दो कर्मों को करता हुआ मनुष्य इस संसार में यश और गौरव पाता है।
दो व्यक्ति दूसरों पर विश्वास करके कार्य करने वाले होते हैं- 1. दूसरी स्त्री द्वारा चाहे गये पुरुष की कामना करने वाली स्त्रियाँ। 2. दूसरों के द्वारा पूजित मनुष्य का सम्मान करने वाला मनुष्य।
शरीर को सर्वथा सुखा देने वाले ये दो तीखें कांटे हैं- 1. निर्धन होकर महत्वाकांक्षी होना बड़े-बड़े मनोरथ करना और 2. असमर्थ होकर क्रोध करना।
दो प्रकार के मनुष्य अत्यन्त आनन्दित रहते हैं। 1. समर्थ होते हुए भी क्षमाशील और 2. दरिद्र होकर भी दान देने वाला।
न्यायपूर्वक कमाये हुए धन के दो ही दुरुपयोग है- 1. कुपात्र को तो दान देना और सत्पात्र को कुछ न देना।
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